अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सकारात्मक बातचीत कर रहे हैं। यह कूटनीतिक पहल उस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने की उम्मीद जगाती है, जो विश्व की लगभग 20% तेल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार है[reference:0]。
हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर था। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद से इस रणनीतिक जलमार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था[reference:1]। सोमवार को केवल आठ जहाज़ों ने इस मार्ग का उपयोग किया, जबकि शांतिकाल में प्रतिदिन लगभग 130 जहाज़ गुजरते थे[reference:2]। इस स्थिति ने वैश्विक तेल की कीमतों को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी थीं[reference:3]।
🔹 वार्ता का विवरण: क्या हो रहा है?
ईरान और ओमान के बीच बातचीत का केंद्र दो मुख्य प्रश्न हैं: होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसका नियंत्रण होगा और क्या ईरान वाणिज्यिक जहाजों से शुल्क वसूल सकता है[reference:6]। प्रस्तावित योजना के तहत, फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज़ ईरानी तट के पास एक मार्ग का उपयोग करेंगे, जबकि बाहर निकलने वाले जहाज़ ओमानी जलक्षेत्र से होकर गुजरेंगे[reference:7][reference:8]।
एक अन्य प्रस्ताव के अनुसार, 60 दिनों की अवधि के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और दोनों पक्ष 30 दिनों के भीतर जलडमरूमध्य के बीच के क्षेत्र से समुद्री खानों को साफ़ करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे[reference:9][reference:10]। हालांकि, इस बात पर मतभेद बना हुआ है कि क्या शुल्क लिया जाना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि “मैं उन्हें शुल्क लेने की अनुमति नहीं दूंगा... अगर कोई शुल्क लेता है, तो हम भी लेंगे”[reference:11]。
🔹 अमेरिका की भूमिका और ईरान का रुख
जहाँ एक ओर अमेरिकी अधिकारी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि वे वार्ता में शामिल हैं[reference:12][reference:13], वहीं ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता से साफ़ इनकार किया है[reference:14]। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा कि वार्ता ईरान और ओमान के बीच द्विपक्षीय है और इसका अमेरिका से कोई लेना-देना नहीं है[reference:15][reference:16]।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि अकेले ओमान के साथ समझौता होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत नहीं खोलेगा[reference:17]। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी ‘होस्टिल एक्टिविटीज़’ (शत्रुतापूर्ण गतिविधियाँ) बंद नहीं करता, जलडमरूमध्य बंद रहेगा[reference:18][reference:19]। ईरानी अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य युद्ध-पूर्व स्थिति में कभी नहीं लौटेगा[reference:20]।
🔹 मध्यस्थों की भूमिका
इस कूटनीतिक प्रयास में ओमान की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके क्षेत्रीय जल से भी होकर गुजरता है[reference:24]। ओमान लंबे समय से ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है[reference:25]। इसके अलावा, क़तर, पाकिस्तान और सऊदी अरब के अधिकारियों ने भी मध्यस्थता के प्रयासों में भाग लिया है[reference:26][reference:27]।
🔹 वैश्विक प्रभाव और चुनौतियाँ
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है। इसके बंद होने से तेल की कीमतों में उछाल आया था, और इसके फिर से खुलने से बाजार में राहत की उम्मीद है[reference:28]। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि रास्ता अभी भी कठिन है। कई मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं, जिनमें शुल्क, नियंत्रण, और अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील शामिल हैं[reference:29]।
एक और चुनौती यह है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश होर्मुज को बायपास करने के लिए वैकल्पिक तेल परिवहन मार्ग विकसित कर रहे हैं[reference:30]। इससे ईरान की भविष्य में जलडमरूमध्य के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को प्रभावित करने की क्षमता कम हो सकती है[reference:31]।
🔹 क्या समझौता संभव है?
फिलहाल, संकेत सकारात्मक हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराग़ची ने कहा है कि वार्ता “अपने अंतिम चरण में” है[reference:32]। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी आशावाद व्यक्त किया है कि “जलडमरूमध्य बहुत जल्द खुलने वाला है”[reference:33]। हालाँकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो “उन पर बहुत कठोर हमला किया जाएगा, और फिर जलडमरूमध्य खुल जाएगा”[reference:34]।
🔹 निष्कर्ष: ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रही बातचीत एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल है। यह न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालाँकि अभी कई मुद्दों पर सहमति बाकी है, लेकिन दोनों पक्षों की सकारात्मक मंशा और मध्यस्थों की सक्रिय भूमिका एक ऐतिहासिक समझौते की उम्मीद जगाती है। आने वाले दिनों में यह तय करेंगे कि क्या यह कूटनीतिक प्रयास सफल होता है या फिर तनाव की स्थिति बनी रहती है।
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